Mitti ki khusboo

"दो हाथों की कला से बर्तन में कहलाया हूं,
खाना पकाने का जरिया में कहलाया हूं"।।
"इस मिट्टी से बैर करो मत, ये मिट्टी ही सोना है।
इसी में हंसना इसी में गाना, इसी में यारों रोना है।
इस मिट्टी में जन्म लिये हो, इसी मिट्टी में रहना है।
इसी में खा के इसी में जा के, इसी में वापस आना है"।।
"बड़े-बड़े योद्धाओं का अंत हुआ है इस मिट्टी में, फिर जाकर इतिहास रचाया इस मिट्टी की परतों ने"।।
"कितने ही जीव जंतु इंसान मैंने बनाए हैं फिर भी इन के बोझ तले कितने जुलम सहाय है,मुझसे ही यह जीव जंतु इंसान मुझसे ही इनका रहना खाना पीना फिर भी कितना मतलबी है इंसान"।।

Mitti ki khusboo Mitti ki khusboo Reviewed by Neelam on May 10, 2020 Rating: 5

18 comments:

  1. bahut badhiya ... nice story... Dogs ka insaano ke sath pyar ... iske upar bhi ek post likh do ...

    ReplyDelete
  2. Nice story....... great writing ...keep it 👍👍👍👍

    ReplyDelete
  3. Nice thought 👏👏👏 हम आशा करते हैं कि आप इसी तरह अपनी पंक्तियां को हम सब से सांझा करते रहेंगे। ✍️✍️✍️🙏🙏🙏💐💐💐

    ReplyDelete

Thank You for Response we will try to get more Better blogs

Powered by Blogger.