someone's imagination

क्या लिखूं इस फलसफर की दास्तान यूं  तो बहुत सी कहानियां पढ़ी लिखी है मैंने,
पर आज कुछ अपने दिल की सुनने को मन करता है,
नाजाने क्यों आज तुम्हे करीब से जानने को जी चाहता है।
मन तो करता है की पूरी जिन्दगी यूहीं करे तुम्हारी बातें तकिए तले दबा सिर, नाजाने पलक झपकते कहां ओझल हो जाते हो तुम।
फिर भी तुम्हें पाने की चाह में सोचता हूं ,
कि ऐसा क्या लिखूं जिसे पढ़ तुम आ जाओ मेरी बाहों में। 
जी भर के देखू इस कदर की थम जाए ये पल यही 
आज फिर सोचता हूं कि क्या लिखूं मै।
"अभी बाकी है मेरी जिन्दगी में कुछ ऐसा काम कि रखे जमाना याद फिर सोचता हूं कि क्या लिखूं मै आज"
someone's imagination someone's imagination Reviewed by Neelam on May 06, 2020 Rating: 5

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